भाजपा नेताओं का मानना है कि यदि इसी बीच बृजभूषण शरण सिंह अयोध्या में रैली करते हैं, तो इससे विपक्ष को राजनीति करने का बड़ा अवसर मिल जायेगा। यही कारण है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भी बृजभूषण शरण सिंह को पीछे हटने के संकेत दिए गए हैं...
उनकी रैली को अनुमति न मिलने को सांसद के खिलाफ लगातार बढ़ते जन आक्रोश का परिणाम माना जा रहा है। भाजपा के अंदरखाने भी उनको लेकर नेताओं में नाराजगी बढ़ने की बात सामने आ रही है।
कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बृजभूषण शरण सिंह की अयोध्या रैली से संतुष्ट नहीं थे। जिस समय योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में अपराधियों पर कठोर कार्रवाई कर अपनी एक अलग छवि बनाई है, उस बीच यदि बृजभूषण शरण सिंह अयोध्या में रैली करते तो इसका नकारात्मक असर पड़ता।
पार्टी में आंतरिक स्तर पर भी कोई नेता बृजभूषण शरण सिंह के साथ नहीं है। लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि पार्टी को आखिर बृजभूषण शरण सिंह का बचाव क्यों करना चाहिए?
पार्टी नेता चाहते हैं कि अब इस मामले में देर नहीं की जानी चाहिए और उन पर कड़ी कार्रवाई कर महिलाओं के बीच बेहतर संदेश देना चाहिए।

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